विकास कार्यो के नाम पर धन आहरित करने पर प्रधान निलम्बित
अंतिम जांच में दोषी पाए जाने पर ग्राम प्रधान हो सकती हैं बर्खास्त
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश में दिन-प्रतिदिन भ्रष्टाचार के मामले प्रकाश में आते रहते हैं। सरकार द्वारा भ्रष्टाचार की खबरे मिलने पर आरोपियों पर कार्यवाही भी होती रहती है परन्तु इसके बावजूद भी लोग भ्रष्टाचार करने से बाज नहीं आते हैं। चाहे सड़क निर्माण हो या फिर नाला या नाली निर्माण अथवा पुल निर्माण हो आदि लगभग सभी विकास कार्यो में भ्रष्टाचार के कारण गुणवत्तायुक्त कार्य नहीं हो पाते हैं। जिस कारण सड़कें कुछ समय बाद ही क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। आपको बता दें कि जनपद सहारनपुर के विकासखण्ड रामपुर मनिहारान की ग्राम पंचायत देहरी में विधायक निधि से बनी सड़क को ग्राम पंचायत निधि की दिखाकर दो लाख 63 हजार रुपये पंचायत निधि से निकालने के मामले में महिला ग्राम प्रधान को निलंबित कर दिया गया। अंतिम जांच रिपोर्ट में प्रधान अगर दोषी पाई गई तो बर्खास्त भी किया जा सकता है। ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई को नियुक्ति अधिकारी को पत्र लिखे जाने की सूचना मिली है। दरअसल, रामपुर मनिहारान विकासखण्ड की ग्राम पंचायत देहरी में विधायक निधि से सीसी रोड बनी थी। आरोप है कि ग्राम प्रधान रेनू और ग्राम पंचायत सचिव संदीप कुमार ने ग्राम पंचायत निधि से बनी सड़क दिखाते हुए दो लाख 63 हजार रूपये का फर्जी भुगतान ग्राम पंचायत निधि से कर लिया। शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने एसडीएम रामपुर मनिहारान की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर जांच कराई। जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक शर्मा ने बताया कि प्रथम दृष्टया जांच में दोषी मिलने पर जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया। ग्राम प्रधान को निलंबित करने के साथ ही प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों पर को रोक लगा दी है। जिलाधिकारी ने अंतिम जांच जिला विकास अधिकारी और पीडब्लयूडी के अधिशासी अभियंता को सौंपी है। ऐसा नहीं कि जनपद में इस प्रकार के भ्रष्टाचार का यह पहला मामला हो बल्कि अभी हाल ही में ब्लाॅक गंगोह में कोरोना काल के समय 13 विकास अधिकारियों ने 98 ग्राम पंचायतों के खातों से लगभग आठ करोड़ रूपये निकालने का मामला प्रकाश में आया था। जिसमें मण्डलायुक्त सहारनपुर हृषिकेश भास्कर यशोद द्वारा संलिप्त कर्मचारियों व अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय जांच के निर्देश दिये हंै। वहीं कई मामले ऐसे भी हैं जिनमें जांच अधिकारी द्वारा दोषी सचिवों एवं प्रधानों को बचाते हुए शिकायतकर्ता को ही घुटने टेकने पर मजबूर किया है। ऐसी स्थिति में शायद ही कोई शिकायत करने की हिम्मत जुटा पाये और अन्नतः सबकुछ देखते हुए भी लोग आंख, कान और मुंह बंद कर लेने पर मजबूर हो रहे हैं। क्योंकि शिकायतों पर कार्यवाही कम और राजनीति ज्यादा हो रही है। ऐसे में विकास कार्यो में गुणवत्ता की उम्मीद लगाना बेकार की बात है। अब सवाल यह उठता है जहां भाजपा सरकार जीरो टोलरेंस के दावे करती नहीं थकती वहीं ऐसे में भ्रष्टाचार किसी भी विभाग में रूकने का नाम नहीं ले रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि देश से भ्रष्टाचार थोड़ा भी कम हो जाये तो विकास कार्यो में गुणवत्ता वही अंग्रेजी जमाने वाली आना लाज़मी है। गौरतलब है कि अंग्रेजी शासनकाल में बने पुल व इमारते आज भी खड़ी हैं। वह बात दिगर है कि पुरानी व संकरी होने पर पुलों व इमारतों को ध्वस्त कर नया बनाया जा रहा है। अलबत्ता अंग्रेजी शासनकाल में विकास कार्यो की गुणवत्ता का जवाब नहीं। परन्तु भ्रष्टाचार के चलते खासतौर से उत्तर प्रदेश में विकास कार्यो की गुणवत्ता पूरी तरह फिसड्डी मानी जाती है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *